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Story - Atma, Episode - 8

**एपिसोड 8: ** नया दिन कमरे का वातावरण अत्यंत तनावपूर्ण और विचित्र हो गया था। बुआ जी की दृष्टि साक्षी (देव) पर टिकी थी, जो अभी-अभी 'डेडलिफ्ट' की मुद्रा में उनके चरण स्पर्श करके उठी थी। बुआ जी का मुख आश्चर्य से खुला रह गया था। **बुआ जी:** (आँखें फाड़कर) "हे ईश्वर! पुत्री साक्षी, यह कैसी विचित्र मुद्रा थी? चरण स्पर्श करने का यह कैसा नया विधान है? तुम्हारी पीठ एकदम सीधी थी और घुटने ऐसे मुड़े थे जैसे कोई भारी शिला उठा रही हो!" **साक्षी (देव):** (साक्षी के सुरीले स्वर में, परंतु एकदम फिटनेस प्रशिक्षक की भांति) "बुआ जी, इसे 'हिप हिंज' (Hip Hinge) कहते हैं। यदि मैं पीठ झुकाकर आपके चरण स्पर्श करती, तो मेरी रीढ़ की हड्डी पर अनुचित दबाव पड़ता। हमें सदैव अपने 'कोर' (Core) को कठोर रखना चाहिए। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है।" बुआ जी ने अपना माथा पकड़ लिया। उन्हें तनिक भी भान नहीं था कि यह 'कोर' क्या होता है। स्थिति को बिगड़ता देख, **देव (साक्षी)** अपने विशाल, चौड़े शरीर के साथ अत्यंत कोमलता से बुआ जी के समीप आया। वह सोफे पर ऐसे बैठा जैसे कोई नवविवाहिता वधू बैठती है। उसने अपने दोनों घुटने आपस में चिपका लिए और अपने विशाल हाथों को अपनी गोद में अत्यंत शालीनता से रख लिया। **देव (साक्षी):** (अपने भारी, मर्दाने स्वर में, परंतु अत्यंत मधुरता से) "बुआ जी, आप साक्षी की बातों पर ध्यान न दें। यह आजकल व्यायामशाला (Gym) अधिक जाने लगी है। आप बताइए, आपकी यात्रा कैसी रही? मार्ग में कोई कष्ट तो नहीं हुआ?" बुआ जी देव के इस अत्यंत कोमल और शर्मीले व्यवहार को देखकर और भी अधिक भ्रमित हो गईं। एक छह फुट का हृष्ट-पुष्ट पुरुष, जिसके बाहुपाश इतने विशाल हैं, वह इतनी कोमलता और लज्जा से कैसे बात कर सकता है? **बुआ जी:** "यात्रा तो ठीक रही बेटा देव। परंतु तुम इतने सिमट कर क्यों बैठे हो? छाती चौड़ी करके, एक वीर पुरुष की भांति बैठो। यह क्या कन्याओं की भांति घुटने जोड़ रखे हैं?" देव (साक्षी) ने लज्जा से अपनी पलकें झुका लीं और अपने भारी हाथों से अपने बालों की लट को कान के पीछे करते हुए बोला, "बुआ जी, मुझे ऐसे ही बैठना प्रिय है। अधिक फैलकर बैठना मुझे असभ्य प्रतीत होता है।" कमरे के द्वार के पीछे छिपे उनके चारों मित्र (कबीर, रॉकी, नेहा और पूजा) यह दृश्य देखकर अपनी हंसी रोकने के लिए अपने मुख पर हाथ रखे हुए थे। कबीर तो हंसी के कारण फर्श पर ही लोट गया था।